लखनऊ के निराला नगर में सरस्वती कुंज परिसर स्थित प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) उच्च तकनीकी (डिजिटल) सूचना संवाद केंद्र में ऑनलाइन शिक्षण को लेकर 28 सितम्बर से प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहा है, जिसका आज समापन हो गया है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के कानपुर प्रांत के झांसी और कन्नौज संभाग से आए 35 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया।
प्रोफेसर राजेन्द्र सिंह रज्जू भैया सूचना संवाद केंद्र में शिक्षकों का पांच दिवसीय प्रशिक्षण सम्पन्न

Lucknow. आज दिनांक 02 अक्टूबर 2020 को राजधानी लखनऊ के निराला नगर में सरस्वती कुंज परिसर स्थित प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) उच्च तकनीकी (डिजिटल) सूचना संवाद केंद्र में ऑनलाइन शिक्षण को लेकर 28 सितम्बर से प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहा है, जिसका आज समापन हो गया है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के कानपुर प्रांत के झांसी और कन्नौज संभाग से आए 35 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया। समापन सत्र के दौरान प्रशिक्षु शिक्षकों ने अपने-अपने अनुभवों को साझा किया।

प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) उच्च तकनीकी (डिजिटल) सूचना संवाद केंद्र में प्रशिक्षण के समापन सत्र की शुरुआत सरस्वती वंदना के साथ हुई। इस दौरान भारतीय शिक्षा परिषद के सचिव श्री दिनेश जी, विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय प्रचार प्रमुख श्री सौरभ मिश्र जी, अवध प्रांत के प्रदेश निरीक्षक श्री राजेंद्र बाबू जी और वरिष्ठ पत्रकार श्री प्रमोद गोस्वामी जी ने मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पार्चन कर दीप प्रज्ज्वलित किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन सत्र में विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय प्रचार प्रमुख श्री सौरभ मिश्र जी ने कहा कि विद्या भारती एलएमएस (लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम) मोबाइल एप देश का पहला ऐसा वर्चुअल स्कूल है, जहां सभी विषयों की अध्ययन सामग्री उपलब्ध है। जिसे छात्र डाउनलोड भी कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि विद्या भारती ने इस प्रकल्प पर पिछले वर्ष जुलाई से ही काम करना शुरू कर दिया था। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी में लॉकडाउन के दौरान पूरी दुनिया ठहर गई थी, लेकिन विद्याभारती के तकनीकि विशेषज्ञ घर से ही एलएमएस एप को पूर्ण स्वरूप देने में लगे रहे। उन्होंने कहा कि एलएमएस एप से विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के 1088 विद्यालयों में से आधे से अधिक पूरी तरह से जुड़ चुके हैं। 

उन्होंने कहा कि एलएमएस एप के माध्यम से सभी बच्चों की विषय के अनुसार उपस्थिति भी दर्ज होगी, उसे होम वर्क भी दिया जाएगा। छात्र अपने होम वर्क को एप पर भी अपलोड कर सकेंगे, जिसका मूल्यांकन भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन शिक्षण कार्य ऐसे शिक्षक कर रहे हैं, जो अपने विषय में सबसे ज्यादा पारंगत हैं। इसके साथ ही आईआईटी जैसे उच्च शिक्षा संस्थानों से जुड़े विषय विशेषज्ञ भी शिक्षण कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में आज कई शहर कोचिंग के हब बन गए हैं, जिसकी वजह से लाखों की संख्या में छात्रों का पलायन हो रहा है। इसके साथ ही अभिभावकों पर आर्थिक और मानसिक दबाव भी बढ़ रहा है, जिसे रोकने के लिए विद्याभारती ने छात्रों को घर बैठे रोजगारोन्मुखी शिक्षा उपलब्ध कराने का संकल्प लेते हुए विद्या प्रबोधन एप भी शुरू किया है, जहां देश की सर्वश्रेष्ठ फैकल्टी है।

विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय मंत्री डॉ. जय प्रताप सिंह जी गाजियाबाद से आनलाइन माध्यम से जुड़े। उन्होंने कार्यक्रम में आए सभी महानुभाओं और आचार्यों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि आज के युग में डिजिटल लर्निंग का काफी महत्व है। ऐसे में शिक्षा की गुणवत्ता बनी रहे, इसके लिए हम सभी को अभिनव प्रयास करने चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें क्वालिटी एजुकेशन की तरफ ध्यान देना चाहिए, ताकि छात्रों को सफलता मिल सके। उन्होंने कहा कि कोरोना जैसी महामारी में हमारे पास कोई विकल्प नहीं था, इसलिए ऑनलाइन शिक्षा का सहारा लिया है। हमारे लिए ये सबसे बड़ी चुनौती है कि अब हम छात्रों को घर बैठे कैसे गुणवत्तापरक शिक्षा मुहैया करा सकें। उन्होंने कहा कि हमने ऐसा विकल्प चुना है, जो सस्ता भी है। 

वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद गोस्वामी ने कहा कि किसी भी देश के विकास लिए शिक्षा एक अहम भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि वही देश प्रगतिशील है, जिसकी शिक्षा प्रणाली चाक-चौबंद है। उन्होंने विद्या भारती की पहल को सार्थक बताया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि देश के विकास के लिए शिक्षक ही पहली कड़ी हैं। इसलिए शिक्षक को अपने आचार-विचार पर विशेष ध्यान देना चाहिए, क्योंकि छात्र उन्हीं को देखकर सीखते हैं। 

दैनिक जागरण के राज्य संपादक श्री आशुतोष शुक्ला जी ने कार्यक्रम में मौजूद शिक्षकों को बेसिक ज्ञान पर ध्यान देने की अपील की। साथ उन्होंने कहा कि हमारे देश में नई शिक्षा नीति लागू की गई है, जिसमें कई बड़े बदलाव की बात कही गयी। हालांकि इन बदलावों को तब तक सार्थक नहीं माना जा सकता, जब तक देश के इतिहास और संस्कृति को लेकर नए सिरे से विचार न किया जा सके। उन्होंने कहा कि अब तक हमने जो पढ़ा है, उसी को पढ़ाएंगे तो उसमें कुछ नया नहीं है। उन्होंने कहा कि भारतीय चिंतन और परम्परा तर्क पर चलती है। हमारे यहां प्रश्न पूछने की परम्परा है। इसलिए हमें तार्किक शिक्षा पर महत्व देना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन शिक्षा के साथ-साथ हमें किताबों पर भी फोकस करना चाहिए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भारतीय शिक्षा परिषद के सचिव श्री दिनेश जी ने कहा कि विद्या भारती पिछले 72 वर्ष से सनातन परंपरा की वाहक है और बच्चों में उसके संस्कार डाल रही है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति विद्या भारती के विचारों के अनुरूप है। माननीय राज्यपाल ने विद्या भारती का पाठ्यक्रम और उसकी पुस्तकें देखी हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में जो कुछ भी है, वह एक-एक शब्द इन पाठ्यक्रमों में समाहित है। उन्होंंने कहा कि आज के समय में डिजिटल लर्निंग का काफी महत्व है। इसके लिए भी विद्या भारती पूरी तरह से तैयार है और टीम भी काम कर रही है। विद्या भारती एलएमएस, विद्या प्रबोधन ऐप पूरी तरह से काम कर रहे हैं, जिसके जरिए हम भैया-बहनों को ऑनलाइन बेहतर शिक्षा उपलब्ध करा रहे हैं।

इस मौके पर विद्याभारती के कई वरिष्ठ अधिकारी और अन्य गणमान्य आनलाइन माध्यम से भी जुड़े, जिसमें गाजियाबाद से विद्या भारती के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री माननीय यतींद्र जी, विद्याभारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय संगठन मंत्री माननीय हेमचंद्र जी, विद्या भारती पश्चिमी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय संगठन मंत्री माननीय डोमेश्वर साहू जी, विद्याभारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के मंत्री माननीय जय प्रताप जी और नवभारत टाइम्स के संपादक श्री सुधीर मिश्रा जी शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश प्रचार विभाग के सह संयोजक श्री भास्कर दुबे जी ने सभी अतिथियों का परिचय कराया। कार्यक्रम का संचालन अवध प्रांत के प्रदेश निरीक्षक श्री राजेंद्र बाबू जी ने किया। इस दौरान उन्होंने प्रशिक्षु शिक्षकों से प्रशिक्षण में मिले अनुभवों पर फीडबैक मांगा। इसके बाद सभी शिक्षकों ने एक-एक कर अपने अनुभव साझा किए। 

बता दें कि प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन 28 सितम्बर को हुआ था, जिसमें विद्या भारती के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री श्री यतीन्द्र जी और राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव श्री महेश गुप्ता जी मुख्य अतिथि​ के रूप में मौजूद रहे।

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