अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति चुनाव में अपने प्रतिद्वंद्वी जो बिडेन पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि वह जीतते हैं तो इससे राष्ट्र खतरे में आ जाएगा और अमेरिका का प्रभुत्व नष्ट हो जाएगा।
ट्रंप का हमला- अमेरिकी प्रभुत्व को तबाह कर देंगे बिडेन

-- शिव प्रसाद सिंह

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति चुनाव में अपने प्रतिद्वंद्वी जो बिडेन पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि वह जीतते हैं तो इससे राष्ट्र खतरे में आ जाएगा और अमेरिका का प्रभुत्व नष्ट हो जाएगा। वह रिपब्लिकन पार्टी द्वारा पुन: राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने और उसे स्वीकार करते हुए व्हाइट हाउस के साउथ लॉन से भाषण कर रहे थे। उनका कहना था कि बिडेन प्रशासन तले कोई भी सुरक्षित नहीं होगा। बिडेन अमेरिकी अंतरात्मा के रक्षक नहीं हैं। उन्होंने अमेरिकी रोजगार को तबाह कर दिया और मौका मिला तो वह अमेरिकी प्रभुत्व को नष्ट कर देंगे। बिडेन का रिकॉर्ड शर्मिंदगी से भरा हुआ तथा हमारे जीवनकाल में सबसे विनाशकारी विश्वासघातों तथा बड़ी गलतियों से भरा हुआ है।

ट्रंप और उनके साथ उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार माइक पेन्स को तीन नवंबर के चुनाव में बिडेन और उनकी भारतीय मूल की साथी सीनेटर कमला हैरिस से चुनौती मिल रही है। ट्रंप ने अपने भाषण में आरोप लगाया, 'बिडेन ने उत्तर अमेरिकी मुक्त व्यापार समझौते (नाफ्टा) जैसी त्रासदी के लिए मतदान किया जो अब तक की सबसे भयावह सहमति थी। उन्होंने विश्व व्यापार संगठन में चीन के प्रवेश का समर्थन किया जो अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक त्रासदी है।' ट्रंप ने 2016 के चुनाव प्रचार में नाफ्टा को हटाने का संकल्प जताया था। बाद में उन्होंने इसकी जगह अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा समझौते (यूएसएमसीए) को लागू किया।

ट्रंप ने कहा कि एक राष्ट्र के रूप में अमेरिकी महानता के बावजूद अमेरिका ने जो कुछ भी हासिल किया, वह सब खतरे में है। यह हमारे देश के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण चुनाव है। पहले कभी मतदाताओं के सामने दो पार्टियों, दो दृष्टिïयों, दो दर्शनों या दो एजेंडों के बीच इतना स्पष्ट चुनाव नहीं था। यह चुनाव फैसला करेंगे कि हम अमेरिकी सपनों को बचाएं या अपनी अब तक की संजोई नियति को नष्ट करने वाले समाजवादी एजेंडा को आने दें। यह तय करेगा कि हम तेजी से लाखों उच्च वेतन वाले रोजगार सृजित करें या अपने उद्योगों को तबाह कर दें तथा लाखों नौकरियां विदेशों में भेज दें, जैसा कि मूर्खतापूर्ण तरीके से कई दशकों से किया जाता रहा है।'

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