स्‍तन कैंसर के इलाज में मददगार है मधुमक्खी का जहर
स्‍तन कैंसर के इलाज में मददगार है मधुमक्खी का जहर

-- धर्मेन्‍द्र त्रिपाठी

 

स्‍तन कैंसर के रोगियों के लिए एक उम्‍मीद भरी खबर सामने आई है। हाल ही में हुए एक रिसर्च में पता चला है कि यूरोप में पाई जाने वाली मधुमक्खियों का जहर अब तक दवाओं से बेअसर रहे स्तन कैंसर की कोशिकाओं के इलाज में बहुत कारगर साबित हो सकता है। यह रिसर्च ऑस्ट्रेलिया के हैरी परकिंस इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल रिसर्च के शोधकर्ताओं ने किया है। ‘नेचर प्रिसीजन ऑन्कोलॉजी’ जर्नल में यह रिसर्च प्रकाशित हुई है।

 

दरअसल, ऑस्ट्रेलिया के हैरी परकिंस इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल रिसर्च के शोधकर्ताओं ने 312 मधुमक्खियों और भौरों के जहर की जांच-पड़ताल में पाया कि इनमें कैंसररोधी गुण विद्यमान हैं। शोधकर्ताओं की टीम को रिसर्च के दौरान इस बात का पता चला कि मधुमक्खियों के जहर में सबसे ज्यादा पाया जाने वाला ‘मेलिटिन’ ट्रिपल निगेटिव स्तन कैंसर (टीएनबीसी) और एचईआर-2 संवर्धित स्तन कैंसर कोशिकाओं को नष्‍ट करने की क्षमता रखता है। इतना ही नहीं, इस काम के लिए इसके बहुत गाढ़े तरल की जरूरत नहीं होती तो ऐसे में यह दूसरी स्‍वस्‍थ कोशिकाओं को कोई नुकसान भी नहीं पहुंचाता है।

 

इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं का कहना है कि स्तन कैंसर के सभी मामलों में ट्रिपल निगेटिव स्तन कैंसर की संख्‍या लगभग 10 से 15 फीसदी होती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि फिलहाल टीएनबीसी का कोई कारगर इलाज मौजूद नहीं है। रिसर्च करने वाली टीम की प्रमुख शोधकर्ता कियारा डफी ने बताया, ‘मधुमक्खियों का जहर अत्यधिक ताकतवर था। हमने देखा कि मेलिटिन 60 मिनट के भीतर कैंसर कोशिकाओं के मेम्ब्रेन को पूरी तरह खत्म कर सकता है।’

 

पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख वैज्ञानिक प्रोफेसर पीटर क्लिंकेन का कहना है कि मेलिटिन द्वारा इन कोशिकाओं के विकास को रोकने का पता चलना अपने आपमें बेहद अहम है। शोधकर्ताओं का कहना है कि रिसर्च के दौरान इस बात का भी परीक्षण किया गया कि क्या मेलिटिन को पहले से कीमोथेरेपी में इस्तेमाल होने वाली दवाओं के साथ मिलाकर ज्यादा आक्रामक स्तन कैंसर के इलाज में इस्तेमाल किया जा सकता है।

 

प्रमुख शोधकर्ता डफी के मुताबिक, मेलिटिन स्तन कैंसर की कोशिकाओं के मेम्ब्रेन में छेद कर देता है। इसके बाद इलाज के दौरान इन कोशिकाओं के भीतर प्रवेश करने का रास्ता बन जाता है और इन कोशिकाओं को नष्‍ट करना आसान हो जाता है। मेलेटिन को डोसिटेक्सेल (कीमोथेरेपी की एक दवा) के साथ मिलाकर इस्तेमाल करने पर यह चूहों में ट्यूमर के विकास को रोकने में काफी सफल रही है।

गौरततलब है कि दुनिया भर की महिलाएं सबसे ज्यादा स्तन कैंसर की शिकार होती हैं। फेफड़ों के कैंसर के बाद दुनिया भर में सबसे ज्यादा स्तन कैंसर के ही मामले सामने आते हैं। वर्ष 2018 में पूरी दुनिया में इसके 20 लाख से ज्यादा मामले सामने आए। लगभग इतनी ही संख्या फेफड़े के कैंसर पीड़ितों की भी थी। जानकारों के अनुसार, अमूमन दुनिया की हर सात में से एक महिला स्तन कैंसर का शिकार बनती है। स्तन कैंसर के कारण मरने वालों की तादाद महिलाओं में 13.7 फीसदी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि नियंत्रित वजन, अल्कोहल का कम इस्तेमाल, ज्यादा शारीरिक गतिविधियां और स्तनपान कराकर महिलाएं कैंसर का शिकार बनने के जोखिम को कम कर सकती हैं।

 

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