बॉलीवुड में अपने लेखन का लोहा मनवाने वाले गोला गोकर्णनाथ, खीरी के वीरेंद्र सिंह सजल ने नोएडा में फ़िल्मसिटी बनने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त किया है।

Lucknow. बॉलीवुड में अपने लेखन का लोहा मनवाने वाले गोला गोकर्णनाथ, खीरी के वीरेंद्र सिंह सजल ने नोएडा में फ़िल्मसिटी बनने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त किया है। वीरेंद्र सिंह सजल ने उत्तर प्रदेश में फिल्मसिटी की घोषणा पर एक डाक्यूमेंट्री बनाकर उत्तर प्रदेश के लोगों में जागरण अभियान चला रहे हैं। डाक्यूमेंट्री में उन्होंने उत्तर प्रदेश की शानदार लोकेशन और उपयोगिता को देश की जनता के सामने रखने का प्रयास किया है। वीरेंद्र सिंह सजल आज किसी पहचान के मोहताज़ नहीं हैं। उनकी कई फ़िल्में और लघु फ़िल्में सामजिक मार्गदर्शन की प्रतीक मानी जाती हैं। फीचर फ़िल्म ‘जी लेने दो एक पल’ काफी सुर्ख़ियों में रहीं। 'माँ मुझे मार दे', 'सावधान आगे खतरा है', 'देसी रेसलर', 'द बेटर हाफ', 'श्री राधे-राधे', 'वूमनहुड' सभी सामजिक समस्याओं पर आधारित फ़िल्में हैं। 

गुलशन कुमार के सीरियल 'ताज़ा गीत बहार' से अपना फ़िल्मी करियर शुरू करने वाले वीरेंद्र सिंह सजल आज लेखक के साथ-साथ निर्माता और निर्देशक भी बन गए हैं। बतौर निर्माता वीरेंद्र सिंह ने लगभग 80 लघु फिल्मों और 20 फीचर फिल्मों के साथ-साथ एक वेब सीरीज 'ज़िंदगी 99 किलोमीटर' का भी निर्माण किया है। 'ज़िंदगी 99 किलोमीटर' एक साफ सुथरी सामाजिक वेब सीरीज है। 

अभी पिछले दिनों उत्तर प्रदेश की 'फिल्मसिटी' डाक्यूमेंट्री के शूट पर उनसे मुलाक़ात हुई, जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश के अलग अलग जिलों से कलाकारों को बुलाकर फिल्मसिटी के माध्यम से जनता व कलाकारों को जागरूक करने का सन्देश दिया। वीरेंद्र सिंह सजल चाहते हैं कि उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत पूरे देश और दुनिया के सामने आए। बॉलीवुड में लेखक और निर्माता के तौर पर वीरेंद्र सिंह सजल की एक अलग पहचान है। वे सामाजिक, जनजागरण, समरसता की फिल्मों का निर्माण करते हैं। वे अपनी फिल्मों के माध्यम से पूरे देश को एक सूत्र में बांधना चाहते हैं। जब से उत्तर प्रदेश के नोएडा में फ़िल्म सिटी बनने की घोषणा हुई है, तब से वे कलाकारों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश की खूबियों के बारे में लोगों को बता रहे हैं। उनकी डाक्यूमेंट्री 'फिल्म सिटी' में उत्तर प्रदेश के विहंगम स्थानों के बारे में बताया गया है।

वीरेंद्र सिंह सजल बताते हैं कि बॉलीवुड में एंट्री पाना बहुत कठिन है, क्योंकि देश भर के कलाकार मुंबई में ही जमा हैं। इस कारण सभी को मौका मिल नहीं पाता है। बॉलीवुड में नेपोटिज्म नहीं है, लेकिन वहां अपने आपको जमाए रखना बहुत ही कठिन है। मुंबई बहुत महंगी है, इसलिए आर्थिक रूप से कमज़ोर कलाकार के सपने कभी कभी साकार नहीं हो पाते हैं। उत्तर प्रदेश प्रदेश में फ़िल्म सिटी के बन जाने से कलाकारों की ये दूरी भी ख़त्म हो जाएगी। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत के तमाम सोये हुए कलाकार और मृतप्राय कला में संजीवनी फूंकने का काम सीएम योगी ने किया है। फिल्मसिटी किसी विश्वविद्यालय की स्थापना से कम नहीं है। इससे कला और कलाकार को ज़मीन मिलेगी, रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय भाषा और साहित्य का विकास होगा, गली गाँव और कस्बों से नए कलाकार निकलेंगे। खासकर घरेलू कामकाजी महिलाएं भी अपनी प्रतिभा को देश दुनिया के सामने ला सकेंगी।

वीरेंद्र सिंह सजल ने अपनी ज्यादातर फ़िल्में उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश में ही शूट की हैं। उनके सहयोगी निर्माता (डॉ. राजेंद्र सिंह, सुमन वर्मा) मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से हैं, जबकि सुनीता महादेव महाराष्ट्र से हैं, लेकिन उनका रुझान उत्तर प्रदेश है। वीरेंद्र सिंह तमाम निर्माताओं को उत्तर प्रदेश में शूटिंग करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। अपनी फिल्मों में वे उत्तर प्रदेश के कलाकारों को मौका भी दे रहे हैं, जो अत्यंत सराहनीय है। ऐसा करके वे स्वयं को गौरवान्वित महसूस करते हैं। उनका कहना है कि कर्मभूमि मुंबई के लिए उनका समर्पण है ही, लेकिन जन्मभूमि उत्तर प्रदेश के लिए भी पूरा समर्पण है।

वीरेंद्र सिंह सजल चाहते हैं कि फ़िल्म उद्योग उत्तर प्रदेश में खूब फूले फले, जिससे गंगा जमुना का संगम, पूर्वांचल, बुंदेलखंड, तराई, काशी, प्रयाग, छोटी काशी, श्रावस्ती, मथुरा वृन्दावन, अयोध्या, लखनऊ और कानपुर आदि की खूबियां व महान सांस्कृतिक विरासत को देश ही नहीं पूरी दुनिया देखे। उन्होंने कहा कि वह अपनी आगामी फिल्मों भाभी माँ, मैं लखनऊ हूं, मनमोहिनी, तपस्या, लाली और कुकरमुत्ते आदि फिल्मों का शूट उत्तर प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर करेंगे। ज़िंदगी 99 किलोमीटर के बाकी के एपिसोड लखीमपुर जिले में शूट किए जाएंगे। ज़िंदगी 99 किलोमीटर का पहला एपिसोड ही हिट हो गया है। अगले हफ्ते से आगे के एपिसोड रिलीज़ होंगे। उनकी बहुचर्चित फ़िल्म ‘बॉस क्लाइमेक्स अभी बाकी है नवम्बर में रिलीज़ हो रही है। बहुत ज़ल्द फिल्मसिटी की डाक्यूमेंट्री भी दिखाई जाएगी।

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