पांच करोड़ अमेरिकियों की नौकरियां बचाने के दावे पर सवाल, अर्थशास्त्रियों का आकलन-ट्रंप के दावे की चौथाई नौकरियां ही बचाई जा सकी हैं
पांच करोड़ अमेरिकियों की नौकरियां बचाने के दावे पर सवाल

-- शिव प्रसाद सिंह

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन की ओर से किए जा रहे इस दावे से अर्थशास्त्री सहमत नहीं हैं कि कोराना महामारी से उत्पन्न आर्थिक संकट से निपटने के लिए किए गए उपायों से पांच करोड़ से ज्यादा अमेरिकियों की नौकरी बचाई गई है। ट्रम्प ने न्यू जर्सी के बेडमिनस्टर के कंट्री क्लब में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि -'मैंने ऐतिहासिक राहत पैकेज के माध्यम से पांच करोड़ अमेरिकियों की नौकरियां बचाई हैं। उनके विरोधी इस तरह के आंकड़ों को पसंद नहीं करते क्योंकि ये आंकड़े नवंबर में होने वाले चुनावों में उन्हें नुकसान पहुंचा सकते हैं।

ट्रंप ने आर्थिक समस्याओं से निपटने के लिए अपने प्रशासन द्वारा किए गए उपायों का उल्लेेख करते हुए कहा कि अनुमान है कि करदाता के पैसे से बड़ी रकम फण्ड किया गया। पे-चेक प्रोटेक्शन प्रोग्राम ने लगभग 5.1 करोड़ नौकरियां बचाई हैं। रिपब्लिकन पार्टी, उसके नेता और सबसे बढ़कर स्वयं राष्ट्रपति ट्रंप इस बात का जोरशोर से प्रचार कर रहे हैं। सोमवार को उत्तरी कैरोलिना में रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन में भी ट्रम्प ने इस बात का प्रमुखता का उल्लेख किया था।

इसके विपरीत एक समाचार एजेंसी की ओर किए गए अर्थशास्त्रियों के साक्षात्कारों और पे-चेक प्रोटेक्शन प्रोग्राम के डाटा के विश्लेषण से यह सिद्ध होता है कि इस कार्यक्रम के सहारे 5.1 करोड़ लोगों की नौकरियां बचाने का दावा सही नहीं है। आधा दर्जन अर्थशास्त्रियों का मानाना है कि इस कार्यक्रम से दस लाख से लेकर 1.4 करोड़ तक नौकरियां बचाई गई हैं लेकिन यह आंकड़ा ट्रंप के दावे का एक-चौथाई है।

अमेरिका के ट्रेजरी विभाग में 13 साल वित्तीय अर्थशास्त्री रहे रिचर्ड प्रिसिनज़ानो का कहना है कि उन्हें नहीं लगता कि कोई अर्थशास्त्री है जो यह कहेगा कि इस पीपीपी कार्यक्रम ने पांच करोड़ नौकरियां बचाई गई हैं। प्रिसिनज़ानो ने अपना अनुमान एमआईटी तथा अन्य स्थानों पर शोध कर रहे शोधार्थियों के विश्लेषण के आधार पर व्यक्त किया है। उनका मानना है कि अमेरिका में रोजगार पाँच और सात मिलियन (50-70 लाख) के बीच ही बचाया जा सका है।

ट्रंप प्रशासन के अधिकारी 5.1 करोड़ के आंकड़े को लेकर अलग-अलग स्पष्टïीकरण दे रहे हैं। पीपीपी कार्यक्रम की देखरेख कर रहे ट्रेजरी विभाग और लघु व्यवसाय प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि 5.1 करोड़ उन श्रमिकों की संख्या दर्शाती है जिन्हें अलग-अलग व्यवसायों से लोन मिलना तय हुआ है न कि वे जिनकी नौकरी बच गई है। 

पूरी स्टोरी पढ़िए