क्या महिलाओं को सुरक्षित माहौल दे पाएगी सेफ सिटी परियोजना?
क्या महिलाओं को सुरक्षित माहौल दे पाएगी सेफ सिटी परियोजना?

New Delhi. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 16 दिसम्बर, 2012 को हुए निर्भया केस ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। इस घटना के विरोध में पूरे देश में प्रदर्शन हुए थे। इसके बाद से महिलाओं की सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय बहस छिड़ गई थी। वहीं, सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक साल बाद यानि साल 2013 में 1000 करोड़ के कार्पस से निर्भया फंड की स्थापना की थी। इस फंड की मानीटरिंग महिला व बाल कल्याण मंत्रालय की सशक्त समिति कर रही है। इस फंड का उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा के लिए किए जाने वाले उपायों को और मजबूत बनाना है। 

केंद्र सरकार ने साल 2018 में सेफ सिटी कार्यक्रम लॉन्च किया है। इसके तहत देश के आठ शहरों मुंबई, दिल्ली, कलकता, लखनऊ, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद तथा अहमदाबाद को शामिल किया है। सेफ सिटी योजना के लिए निर्भया फण्ड स्कीम के तहत 194.44 करोड़ रुपए मंज़ूर किए गए थे। यह केंद्र द्वारा प्रायोजित योजना है, इसमें केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी 60:40 के अनुपात में है।

 इस योजना में अपराध हॉटस्पॉट को चिन्हित किया जाएगा है, इसमें सीसीटीवी कवरेज, ड्रोन आधारित निगरानी, ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रीडिंग का उपयोग शामिल है। इस कार्यक्रम का क्रियान्वयन केन्द्रीय गृह मंत्रालय द्वारा केन्द्रीय महिला व बाल विकास मंत्रालय, केन्द्रीय आवास व शहरी मामले मंत्रालय, सूचना व प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा शहरों के पुलिस आयुक्तों के साथ मिलकर किया जा रहा है।

सेफ सिटी योजना को सबसे पहले लखनऊ में लॉन्च किया गया है। केंद्र सरकार ने इसके तहत 62.89 करोड़ रुपए जारी ​कर दिया है। हालांकि योगी सरकार ने इसी योजना के तहत प्रदेश के 17 अन्य शहरों को भी शामिल किया है, जिसमें कानपुर, प्रयागराज, मेरठ, अलीगढ़, बनारस, अयोध्या, मथुरा, शाहजहांपुर, सहारनपुर, गाजियाबाद, फिरोजाबाद, मुरादाबाद, आगरा, गोरखपुर, झांसी और बरेली है। इसके लिए बजट में 97 करोड़ रुपए का प्रावधान भी किया गया है।

 सेफ सिटी में महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी महिला पुलिस कर्मियों पर ही होगी। उनके पास पिंक स्कूटर और एसयूवी वाहन होगा, जिससे वह शोहदों पर नजर रखेंगी। महिलाओं के लिए पिक टॉयलेट भी बनेंगे। ऐसे इलाकों को चिन्हित किया जाएगा, जहां महिलाओं का आवागमन रहता है। 

इसके साथ ही बसों में सीसीटीवी कैमरे और पैनिक बजट भी होंगे। जगह-जगह महिला पुलिस कियास्क बनेंगे, जहां महिला पुलिसकर्मी तैनात होगी। परियोजना पर निगाह रखने के लिए वूमेन पॉवर लाइन 1090 की क्षमता दोगुनी कर दी जाएगी। महिला कर्मियों को लाने ले जाने के लिए बस और एसयूवी की व्यवस्था की जाएगी। 

हालांकि सेफ सिटी योजना को लागू हुए करीब दो साल पूरे होने वाले हैं, लेकिन अभी तक महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कोई खास सुधार नहीं देखने को मिला है। ऐसे में आगे देखने वाली बात होगी कि क्या यह परियोजना महिलाओं को सुरक्षित महौल दे पाएगी? 

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