प्रदेश की राजधानी लखनऊ के निराला नगर स्थित सरस्वती कुंज में प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) उच्च तकनीकी (डिजिटल) सूचना संवाद केंद्र में पांच दिवसीय प्रशिक्षण सत्र के तीसरे दिन शिक्षकों को आनलाइन टीचिंग के लिए तकनीकि प्रशिक्षण दिया गया।
शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा तकनीकि का इस्तेमाल: यतीन्द्र जी

Lucknow. प्रदेश की राजधानी लखनऊ के निराला नगर स्थित सरस्वती कुंज में प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) उच्च तकनीकी (डिजिटल) सूचना संवाद केंद्र में पांच दिवसीय प्रशिक्षण सत्र के तीसरे दिन शिक्षकों को आनलाइन टीचिंग के लिए तकनीकि प्रशिक्षण दिया गया। इस बैच में विद्या भारती के काशी प्रांत के सुलतानपुर, प्रयागराज और काशी संभाग के 36 शिक्षक शामिल हुए।

इस अवसर पर विद्या भारती के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री यतीन्द्र जी ने कहा कि मानव जाति पर जब संकट आता है तो वह उसका समाधान निकाल ही लेता है, ये उसका स्वभाव है। आज जब वैश्विक महामारी कोरोना वायरस की स्थिति आई तो तकनीकि के जरिए अपना हल निकाल ही लिया है। 21वीं सदी में नई तकनीकि का उपयोग तेजी के साथ बढ़ रहा है, जिससे शिक्षा क्षेत्र भी अछूता नहीं है। हमें खुद को इसके लिए तैयार करना होगा, ताकि दुनिया में हम मुकाबला कर सकें। 

उन्होंने कहा कि हमें समाज में ऐसे व्यक्तित्व का निर्माण करना है, जो देश का अच्छा नागरिक बन सके। इस दौर में हमें विवेकपूर्वक तकनीकि का उपयोग करना है, ताकि तकनीकि हमारे ऊपर हावी न होने पाए। उन्होंने कहा कि तकनीकि की जितनी जरूरत हो उतना ही उपयोग करें। नई तकनीकि के तमाम दुष्प्रभाव भी हैं, लेकिन विद्या भारती के कार्यकर्ता होने के नाते उसका सही तरीके से इस्तेमाल करें।

यतीन्द्र जी ने आगे कहा कि हर चीज के हमें अच्छाई देखनी चाहिए और उसका उपयोग समाज हित में करना चाहिए। विश्व में सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से नई व्यवस्थाएं खड़ी हो रही हैं, जिन्हें समझने की दृष्टि विकसित होनी चाहिए। शिक्षक को दूरदृष्टि से सम्पन्न होना चाहिए, ताकि छात्रों का सही मार्गदर्शन कर सके। उन्होंने कहा कि हमारे अंदर सीखने की निरंतरता बनी रहेगी, तभी हम देश और दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकेंगे।

प्रशिक्षण वर्ग का संचालन दिनेश जी ने किया। इसके बाद शिक्षकों को पीपीटी और आनलाइन टीचिंग का प्रशिक्षण दिया गया। इस अवसर पर हेमचंद्र जी, उमाशंकर जी, राजेन्द्र बाबू जी, योगेश जी, विक्रम बहादुर जी सहित विद्या भारती के कई अधिकारी और शिक्षक मौजूद रहे।

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