लॉकडाउन के 54 दिनों के दौरान कर्मचारियों को पूरा वेतन देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कर्मचारी और कंपनी इसे आपस में समझौता कर सुलझाएं।
लॉकडाउन के दौरान पूरी सैलरी न देने वाली कंपनियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं: सुप्रीम कोर्ट

New Delhi: लॉकडाउन (Lockdown) के 54 दिनों के दौरान कर्मचारियों को पूरा वेतन देने के मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई  हुई। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अपना  फैसला सुनते हुए कहा कि कर्मचारी और कंपनी इस मामले में आपस में समझौता कर इस मामले को सुलझाएं। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि लॉकडाउन  (Lockdown) के दौरान काम करने वालों को पूरा वेतन (Wages/Salary) न देने वाले नियोक्ताओं (Employers) के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई  नहीं होगी। इस मामले को सुलझाने के लिए राज्य के श्रम विभाग (State labor department) इसमें मदद करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट  (Supreme Court) ने शुक्रवार को  MSMEs सहित कई कंपनियों द्वारा दायर की गयी याचिकाओं (Petitions) पर अपना फैसला सुनाया, जिसमें लॉकडाउन  (Lockdown) के दौरान काम करने वालों को नियोक्ताओं (Employers) द्वारा पूरा वेतन न देने पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस भूषण (Chief Justice Bhushan) ने कहा कि हमनें नियोक्ताओं  (Employers) के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई करने का निर्देश नहीं दिया है। कर्मचारियों और नियोक्ताओं (Employees and employers) के बीच सुलह की ज़िम्मेदारी राज्य सरकार के श्रम विभागों (State labor department) को दी जाती है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस पर केंद्र सरकार (Central government) जुलाई के अंतिम सप्ताह तक एक विस्तृत हलफनामा (Affidavit) पेश करेगी।  

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की पिछली सुनवाई में कंपनियों ने यह दलील दी थी की वो 29 मार्च से लेकर 17 मई के बीच के 54 दिनों की पूरी सैलरी देने की हालत में नहीं है। नियोक्ताओं   (Employers) ने दलील देते हुए कहा कि ऐसे मुश्किल हालत में सरकार को उद्योगों (Industries) की मदद करनी चाहिए। वहीं सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कहा गया कि जो भी कंपनी यह कह रही है की वो पूरी सैलरी देने की हालत में नहीं है तो वो फिर अपनी ऑडिटेड बैलेंस शीट (Audited balance sheet) दिखाए। 

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