सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने लोन मोरेटोरियम मामले में लोगों को राहत दी है। कोर्ट ने कहा कि इस केस का जब तक अगला आदेश नहीं आ जाता, तब तक किसी भी कर्जदार पर कोई करवाई न की जाए।
लोन मोरेटोरियम पर सुप्रीम कोर्ट ने दी राहत, अगले आदेश तक कोई भी लोन एनपीए नहीं

New Delhi. सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने लोन मोरेटोरियम मामले में लोगों को राहत दी है। कोर्ट ने कहा कि इस केस का जब तक अगला आदेश नहीं आ जाता, तब तक किसी भी कर्जदार पर कोई करवाई न की जाए। जस्टिस अशोक भूषण ने कहा कि बैंकों को उन कर्जदारों की रक्षा करनी चाहिए न कि उन पर कारवाई। कोर्ट ने कहा कि इस केस की अगली 10 सितंबर को होगी। 

लॉकडाउन के दौरान लोन मोरेटोरियम को आगे बढ़ाने और ब्याज में छूट देने की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही थी। इस मामले में केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि बैंकिंग सेक्टर हमारी अर्थव्यवस्था का रीढ़ है, लिहाजा हम कोई ऐसा फैसला नहीं ले सकते जो अर्थव्यवस्था को और कमजोर करे। इसके साथ ही उन्होंने कोर्ट से कहा कि हम ब्याज को कम नहीं करेंगे, लेकिन लोन चुकाने को लेकर दबाव नहीं बनाएंगे।

बता दें कि आरबीआई ने लॉकडाउन के दौरा 27 मार्च को एक सर्कुलर जारी करके कर्जधारकों को तीन महीने की अवधि तक किश्तों के भुगतान के लिए राहत दी थी। लॉकडाउन लंबा चलने की वजह से आरबीआई ने एक बार फिर 22 मई को किश्तों को चुकाने के लिए राहत दे दी थी, जिसकी अंतिम समय सीमा 31 अगस्त थी। मोरेटोरियम के 6 महीने पूरे होने के बाद ग्राहक अब मांग कर रहे हैं कि इसे और बढ़ाया जाए और उनकी सबसे बड़ी मांग है कि मोरेटोरियम पीरियड के दौरान ब्याज माफ किया जाए।

ग्राहक के अनुसार, बैंक केवल किस्तों को जमा करने की छूट दिए हैं, जबकि किस्तों पर लगने वाले ब्याज पर कोई छूट नहीं है, क्योंकि ईएमआई का ज्यादातर हिस्सा ब्याज का ही होता है। बैंक इस पर भी लगा रहे हैं, जो कि गैरकानूनी है। ग्राहक की इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने RBI और केंद्र से जवाब मांगा था। सुप्रीम कोर्ट ने बैंको से कहा कि जब तक इस केस का निपटारा न हो जाए, तब तक उन खातों को संरक्षण दिया जाए जो अब तक एनपीए नहीं हुए हैं, इस केस की अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी। 

इसके पहले मंगलवार को सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि लोन मोरेटोरियम की अवधि दो सालों तक बढ़ाया जा सकता है, लेकिन यह कुछ सेक्टरों में ही। सरकार ने कहा कि हम ऐसे सेक्टर की पहचान कर रहे हैं कि किसको कितना नुकसान हुआ है उस हिसाब से उनको राहत दी जा सकती है। 

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