क्वाड के प्रमुखों यानी पीएम नरेंद्र मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, आस्ट्रेलिया के पीएम स्कॉट मॉरीसन और जापान के पीएम योशिहिदे सुगा के बीच पहली बैठक आज होगी।
क्वाड देशों ऐतिहासिक बैठक आज

क्वाड देशों यानी जापान, आस्ट्रेलिया, अमेरिका और भारत के प्रमुखों की ऐतिहासिक बैठक को लेकर भारत सरकार की तैयारियां तकरीबन पूरी हो चुकी हैं। लेकिन इसके साथ ही विदेश मंत्रालय का एक पूरा प्रकोष्ठ ब्रिक्स देशों यानी ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के तहत होने वाली कई बैठकों की तैयारियों में किसी भी प्रकार कमी नहीं कर रहा। भारतीय अधिकारी ब्रिक्स के अन्य सदस्य देशों के साथ लगातार संपर्क में हैं, ताकि जून-जुलाई से इस संगठन के तहत विदेश, रक्षा, उद्योग और वित्त मंत्रियों के बीच की बैठक को लेकर अंतिम रूप दिया जा सके।

क्वाड के प्रमुखों यानी पीएम नरेंद्र मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, आस्ट्रेलिया के पीएम स्कॉट मॉरीसन और जापान के पीएम योशिहिदे सुगा के बीच पहली बैठक आज होगी। इस पर विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि निश्चत तौर पर वर्ष 2004 में जो पहल शुरू हुई थी, जिसका महत्वपूर्ण रूप आज क्वाड देशों के प्रमुख लेंगे। बता दें कि वर्ष 2017 में क्वाड के चारों देशों के बीच नए सिरे से विमर्श शुरू किया गया था, जो पिछले एक वर्ष के भीतर ज्यादा गति पकड़ चुका है। नवंबर 2020 और फरवरी 2021 में दो बार चारों देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक हो चुकी है। चारों देश अपनी निजी तैयारियों को पूरा कर रहे हैं। 

जानकारी के मुताबिक, आज यानी शुक्रवार को होने वाली बैठक में भारत के रुख का सवाल है तो यह बहुत हद तक पीएम मोदी की तरफ से शांग्रीला डायलॉग (वर्ष 2018) में दिए गए भाषण के अनुसार ही होगा। मोदी ने तब हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए भारत की नीति बताते हुए सागर (सिक्युरिटी एंड ग्रोथ फार आल इन द रीजन) का नारा दिया था। भारत हर देश के लिए समान अवसर बनाने की नीति के तहत काम करेगा। 

आज शुक्रवार की बैठक में भारतीय पक्ष मुख्य तौर पर दूसरे देशों के साथ मिलकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी साझेदारी को और मजबूत बनाने की योजना बनाएगा। बैठक में निश्चित तौर पर हिंद प्रशांत क्षेत्र की स्थिति एजेंडे में सबसे ऊपर होगी, लेकिन दूसरे वैश्विक मुद्दे, कोरोना के बाद के विश्व में औद्योगिक स्थिति, क्रिटिकल तकनीक (जैसे 5जी आदि) में सहयोग, समुद्री व पर्यावरण सुरक्षा अन्य विषयों पर चर्चा होगी। कोरोना वैक्सीन को पूरी दुनिया में विस्तार देने में चारों देश किस तरह से सहयोग कर सकते हैं, इस पर भी चर्चा होने की सम्भावना है। 

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