बताया जाता है कि यह वही पहाड़ है जहां सीता की खोज में हनुमान जी (Hanuman Ji) सबसे पहले पहुंचे थे। हनुमान जी ने यहीं पर माता सीता की खोज की योजना बनाई थी। यहां पहाड़ पर आज भी हनुमान जी के विशालकाय पैरों के निशान मौजूद हैं।
यहां आज भी मौजूद हैं माता सीता की अग्निपरीक्षा के सबूत

धर्मग्रन्थों में लंका(Lanka) को सोना का एक ऐसा नगर कहा गया है जिस पर त्रेतायुग (Tretayug) में रावण का राज (Ravan Raaj) था। रामायण में इसका जिक्र मिलता है। श्रीलंका में आज भी ऐसे कई जिंदा सबूत हैं जिनका जिक्र रामायण काल (Ramayan Kaal) में मिलता है। यह सभी सीता (Seeta) से जुड़ी हुई मान्यताएं हैं।

नुवारा एलिया यानी अशोक वाटिका (Ashok Vaatika) में मौजूद सीता अम्मन मंदिर से कुछ ही दूरी पर स्थित जगह है देवनारपोल। कहा जाता है कि इस जगह मां सीता ने अग्निपरीक्षा(Agnipariksha) दी थी। इसे आज भी अग्निपरीक्षा स्थल ही कहा जाता है। शांत पहाड़ पर स्थित इस जगह को आज भी सुरक्षित रखा गया है। गोल कुएं के आकार में बना यह अग्निकुंड (Agnikund) ऊंची दीवारों से घिरा है। प्राचीनकाली पत्थरों से बने विशालकाय अग्निकुंड को घेर कर रखा गया है।

बताया जाता है कि यह वही पहाड़ है जहां सीता की खोज में हनुमान जी (Hanuman Ji)  सबसे पहले पहुंचे थे। हनुमान जी ने यहीं पर माता सीता की खोज की योजना बनाई थी। यहां पहाड़ पर आज भी हनुमान जी के विशालकाय पैरों के निशान मौजूद हैं। 

कहा जाता है कि रावण जब सीता माता का अपहरण कर श्रीलंका पहुंचा तो सबसे पहले सीता जो को उसने इसी जगह पर रखा था। जब मां सीता ने रावण के महल में रहने से इंकार किया जब उन्हें अशोक वाटिका में रखा गया।

 सीताजी अशोक वाटिका में जिस वृक्ष के नीचे बैठती थी वो जगह सीता एल्या के नाम से मशहूर हैं। 2007 में श्रीलंका सरकार की एक रिसर्च कमेटी ने भी पुष्टि की थी कि सीता एल्या (Sita Alya) ही अशोक वाटिका है।