यूरोपीय संघ ने कोरोना के अभूतपूर्व संकट से निबटने के लिए ऐतिहासिक योजना बनाई है। यूरोपीय संघ की प्रमुख उर्सुला फॉन डेय लाएन ने कोरोना के असर से निपटने के लिए 27 मई को 750 अरब यूरो की योजना का प्रस्ताव रखा।
कोरोना से निपटने के लिए ईयू को 750 अरब यूरो के पैकेज का प्रस्‍ताव

--धर्मेन्‍द्र त्रिपाठी

यूरोपीय संघ (European Union) ने कोरोना (coronavirus) के अभूतपूर्व संकट से निबटने के लिए ऐतिहासिक योजना बनाई है। यूरोपीय संघ की प्रमुख उर्सुला फॉन डेय लाएन ने कोरोना के असर से निपटने के लिए 27 मई को 750 अरब यूरो की योजना का प्रस्ताव रखा। प्रस्ताव पास कराने के लिए कुछ सदस्य देशों की सहमति जुटाना बाकी है। बता दें कि कोरोना से अमेरिका (USA) के बाद सबसे ज्‍यादा यूरोपीय देश ही प्रभावित हुए हैं। कोरोना वायरस के कारण यूरोपीय संघ (EU) पहले ही अब तक की सबसे गहरी मंदी की चपेट में आ चुका है। फॉन डेय लाएन का यह प्रस्ताव कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों की मदद करेगा। अगर यह प्रस्ताव पास हो गया तो यूरोपीय संघ के इतिहास में यह सबसे बड़ा राहत पैकेज होगा।

बताया जा रहा है कि आर्थिक प्रोत्साहन का यह पैकेज इटली (Italy) और स्पेन (Spain) के भारी दबाव के बाद आया है। ये दोनों ही देश यूरोप में कोरोना वायरस (covid-19) के पहले शिकार बने और अपनी अर्थव्यवस्थाओं को संभालने के लिए इस समय उन्हें भारी कर्ज की जरूरत है। 

प्रस्ताव को अगर इसी रूप में पास कर दिया जाता है तो इटली को अगले तीन सालों में 81.8 अरब यूरो और स्पेन को 77.3 अरब यूरोप की सीधी सहायता मिलेगी। कुल मिला कर यूरोपीय संघ 405 अरब यूरो की सहायता देगा। इसमें से 28.8 अरब यूरो जर्मनी को, जबकि फ्रांस को 38.7 अरब यूरो मिलेंगे। साथ ही देशों को कर्ज भी मिलेगा। 

इटली को 90 और स्पेन को 31 अरब यूरो का कर्ज देने का प्रस्ताव है। इस प्रकार सहायता और कर्ज मिला कर कुल 650 अरब यूरो दिए जाएंगे। बाकी के 100 अरब यूरो यूरोपीय संघ के बचाव कार्यक्रम पर खर्च होंगे।

उल्‍लेखनीय है कि आयोग के प्रस्ताव से कुछ ही दिन पहले जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल (Angela Merkel) ने यूरोपीय संघ के अधिकारियों को बाजार से 500 अरब यूरो की रकम जुटाने के प्रस्ताव पर सहमति जताई थी, ताकि इस प्रस्ताव के लिए धन जुटाया जा सके। 

यूरोपीय संघ की सबसे प्रभावशाली नेता मर्केल ने यह भी कहा कि सहायता ग्रांट के तौर पर दी जाए न कि कर्ज के रूप में। आयोग के सामने अब उत्तरी यूरोप के सदस्य देशों को मनाने की चुनौती है। फ्रूगल फोर के नाम से पुकारे जाने वाले ये देश दक्षिणी यूरोप के कर्ज में डूबे देशों को धन देने का विरोध करते हैं। 

इनका कहना है कि सहायता के लिए सिर्फ कर्ज दिए जाएं। ये देश दक्षिणी देशों पर अपनी क्षमता से ज्यादा खर्च करने और खर्च घटाने के लिए जरूरी सुधारों को लागू करने की बजाय कर्ज लेने में यकीन रखते हैं।

यूरोपीय संघ इससे पहले ही छोटे उपायों को लागू कर चुका है। इनमें रोजगार की योजनाओं के लिए बीमा और नुकसान के साथ चलने के नियमों को स्थगित करना शामिल है। उधर, यूरोपीय सेंट्रल बैंक ने चेतावनी दी है कि कर्ज में डूबे देशों को और ज्यादा कर्ज देने से बाजार को मुश्किल होगी और संघ की मुद्रा यूरो जोखिम में घिर जाएगी।

बता दें कि कोरोना वायरस के कारण यूरोप में अबतक करीब पौने दो लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई है और यहां की अर्थव्यवस्था एक तरह से थम गई है। यहां कारोबार बहुत धीरे-धीरे शुरू हो रहा है और सीमाओं पर लोगों की आवाजाही और व्यापार पर अब भी बहुत सी पाबंदियां हैं।