कोरोना महामारी इस साल के आखिर तक 8.6 करोड़ बच्चों को गरीबी के मुंह में धकेल देगी। 'सेव चिल्ड्रेन' और यूनिसेफ के संयुक्त अध्ययन में यह बात सामने आई है।
कोरोना के कारण 8.6 करोड़ बच्चे गरीबी की चपेट में

-शिव प्रसाद सिंह

कोरोना महामारी (coronavirus) इस साल के आखिर तक 8.6 करोड़ बच्चों को गरीबी के मुंह में धकेल देगी। 'सेव चिल्ड्रेन' (save children) और यूनिसेफ (UNICEF) के संयुक्त अध्ययन में यह बात सामने आई है। बच्चों की सहायता में जुटीं इन दोनों संस्थाओं ने एक अध्ययन में कहा है कि इस साल 67.2 करोड़ बच्चे गरीबी की चपेट में हैं। यह संख्या पिछले साल के मुकाबले 15 प्रतिशत ज्यादा है। इनमें से दो तिहाई बच्चे अफ्रीका (africa) के सब सहारा देशों और दक्षिण एशिया के हैं। कोरोना महामारी (covid-19) की वजह से इस संख्या में बढ़ोतरी यूरोपीय और मध्य एशियाई देशों की वजह से होगी।

यह अध्ययन विश्व बैंक (world bank) और अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष के अनुमानों और सौ देशों से प्राप्त आबादी के आंकड़ों के आधार पर किया गया है। यूनिसेफ के कार्यकारी निदेशक हेनरिएटा फोर ने एक बयान में कहा है कि इस महामारी के कारण गंभीर आर्थिक संकट की वजह से बच्चे आवश्यक सेवाओं से वंचित हो गए हैं। 

इस संकट से गरीब देशों को बचाने के लिए तत्काल और निर्णायक कार्यवाही की जरूरत है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (international monetary fund) की मानें तो 1930 के दशक की वैश्विक महामंदी के बाद यह सबसे बड़ी महामंदी होगी। जाहिर है इस महामंदी से बेरोजगारी तथा गरीबी और बढ़ेगी।

हम भले ही आधुनिक तकनीक से लैस होकर अंतरिक्ष की सैर करने में सक्षम हो चुके हैं, लेकिन एक कड़वी हकीकत यह भी है कि दुनिया की आबादी का पांचवां हिस्सा बेहद गरीब है। करीब 20 करोड़ लोग बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। करोना महामारी से उपजे आर्थिक संकट से यह आंकड़ा और बढऩे वाला है। आने वाली वैश्विक महामंदी (global recession) से सबसे ज्यादा प्रभावित बच्चे होने वाले हैं। 

वर्ष 1997 में एशिया में आए आर्थिक संकट और 2009 में आई वैश्विक महामंदी के अनुभव बताते हैं कि इससे पूरी दुनिया में बाल मजदूरी, बाल दासता, बाल विवाह और बच्चों की खरीद-फरोख्त के मामले तेजी से बढ़े हैं। आशंका जताई जा रही है कि कोरोना महामारी से उपजे आर्थिक संकट की वजह से एक बार फिर इनमें बढ़ोतरी होगी। कोरोना महामारी को रोकने के लिए कई देशों में स्कूल बंद हैं। इन स्कूलों में गरीब बच्चों के लिए मिड-डे मील (mid-day meal) की व्यवस्था होती है। लॉकडाउन (lockdown) की वजह से दुनिया के करीब 37 करोड़ बच्चे मिड-डे मील से वंचित हैं। ऐसे में दुनिया के वंचित और गरीब बच्चों के सामने भुखमरी का संकट पैदा हो गया है।