बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत (Bollywood actor Sushant Singh Rajput) के सुसाइड (Suicide) का कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है।
सुशांत सिंह केस: सीबीआई के घेरे में रिया चक्रवर्ती, जानें कैसे होती है पूछताछ

Mumbai. बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत (Bollywood actor Sushant Singh Rajput) के सुसाइड (Suicide) का कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है। अब इस केस की जांच (Case Investigation) तेज़ी से आगे बढ़ रही है। इस मामले सुशांत के स्टाफ (Staff) से लेकर तमाम जानने वालों को सीबीआई (CBI) रोज बुलाकर पूछताछ कर रही है। अभी तक रिया चक्रवर्ती (Riya Chakraborty) समेत उनके भाई शौविक चक्रवर्ती (Shauvik Chakraborty) के साथ फ़्लैटमेट (FlatMate) सिद्धार्थ पिठानी (Siddharth Pithani) से लंबी पूछताछ की गई है। रिया से तो पिछले 3 दिनों में 26 घंटों तक सवाल जवाब किए गए हैं।

दरसअल, सीबीआई (CBI) के सामने किस लेवल का अपराधी है, इसे देखकर सीबीआई तय करती है कि उससे पूछताछ कैसे करनी है। उसकी हैंडबुक (Handbook) में सब ब्यौरा दिया गया होता है कि जांच की प्रक्रिया (Investigation Process) को आगे कैसे बढ़ाना है। इस हैंडबुक में संदिग्धों का इंटरव्यू (Interview of Suspects) करने और उनके इंटरोगेशन (Interrogation) के तरीके के बारे में बताया गया होता है। 

टॉप अधिकारी (Top Executives) लंबे अनुभव के बाद जूनियर्स (Juniors) के लिए इस हैंडबुक (सांइटफिक इंटरव्यू एंड इंटेरोगेशन टेक्नीक्स) को तैयार करते हैं। इस दस्तावेज (Documents) में संदिग्ध को नौ अलग कैटेगरीज (categories) में रखा जाता है। इस हैंडबुक के अनुसार, सीबीआई पहली बार अपराध करने वालों और गुस्से में क्राइम (Crime) करने वालों के प्रति नरम रखती है। इस पूछताछ में अधिकारी इमोशनल अप्रोच (Emotional Approach) को अपनाते हैं।

सुशांत केस (Sushant Case) में भी रिया के साथ यही तरीका अपनाया गया है, क्योंकि रिया का कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड (Criminal Record) नहीं है। बता दें कि इस पूछताछ के दौरान सीबीआई अधिकारियों (CBI Officials) का ध्यान संदिग्ध के हर शब्द और भाव पर होता है। हैंड बुक में पूरा एक चैप्टर (Chapter) इसी का है।

इस हैंडबुक में वकीलों (Lawyers) का बनाया हुआ, एक इंटेरोगेशन मॉडल (Interrogation Model) भी है। जिसमें पूछताछ करने के लिए अधिकारी के भीतर साइकोलॉजिकल इंटरव्यू (Psychological Interview) करने की क्षमता पर भी जोर दिया गया है। इसमें व्यक्ति के दिमाग को पढ़ना मुश्किल है, परन्तु इसकी जांच इसी से आगे बढ़ती है।

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