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राजनीतिक विरोध टकराव की ओर बढ़ रहा


AMIT SINGH 03/01/2017 1:02

रांची। जमीन संबंधी कानून सीएनटी-एसपीटी में संशोधन की राज्य सरकार की पहल का विरोध भविष्य में टकराव में तब्दील हो सकता है। रविवार को खरसावां में मुख्यमंत्री रघुवर दास का तल्ख विरोध इसकी एक बानगी है। जहां मुख्यमंत्री की मौजूदगी में लगभग एक घंटे तक हंगामा होता रहा। इस अप्रिय घटनाक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने जहां पूरी तरह संयम रखा वहीं जिला प्रशासन ने भी धैर्य बनाए रखा। सीएनटी-एसपीटी संशोधन के मसले पर पूर्व में बंद के दौरान भी राज्य में ङ्क्षहसक विरोध हो चुका है। भाजपा के एक वरीय विधायक के मुताबिक मुख्यमंत्री के राजनीतिक विरोध की प्रतिक्रिया हो सकती है। पार्टी में इसे लेकर गहरा आक्रोश है। राजनीतिक विरोध का तरीका लोकतांत्रिक होना चाहिए। अगर विपक्ष का यही रवैया रहा तो टकराव भी संभव है। 

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दरअसल टकराव की पृष्ठभूमि विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान ही बन चुकी है। विपक्ष ने एक दिन भी सदन चलने नहीं दिया। खासकर झामुमो ने तल्ख रवैया अपनाते हुए यह एलान कर दिया है कि उनके कार्यकर्ता राज्य सरकार के मंत्रियों को गांवों में नहीं घुसने देंगे। इसकी प्रतिक्रिया में राज्य सरकार की मंत्री लुइस मरांडी ने भी कहा है कि भाजपा के कार्यकर्ताओं ने चूडिय़ां नहीं पहन रखी है। अगर हमारे लोगों को रोका गया तो उन्हीं की भाषा में जवाब देने में हमारे कार्यकर्ता सक्षम हैं। बहरहाल तनातनी की इस स्थिति में कभी भी टकराव की नौबत आ सकती है। 
झारखंड विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल झामुमो के सचेतक सह प्रवक्ता कुणाल षाडंगी का दावा है कि खरसावां की घटना भाजपा की अंदरुनी कलह का परिणाम है। मुख्यमंत्री अपनी कमजोरी को झारखंड मुक्ति मोर्चा के मत्थे मढ़ रहे हैं। खरसावां पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा का इलाका है। अर्जुन मुंडा फिलहाल हाशिए पर हैं। यही कारण है कि उनके समर्थकों ने मुख्यमंत्री का तल्ख विरोध किया। पूर्व मुख्यमंत्री को चाहिए था कि वे सीएम का बचाव करते।
प्रदेश कांग्र्रेस ने खरसावां की घटना को राजनीतिक आक्रोश का परिणाम बताया है। पार्टी महासचिव सह प्रवक्ता राजेश ठाकुर के मुताबिक सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन का निर्णय आदिवासियों-मूलवासियों के खिलाफ है। यह अस्तित्व की लड़ाई है। मुख्यमंत्री रघुवर दास को चाहिए कि विधेयक को वापस लें। बगैर लोगों को विश्वास में लिए कानून को जबरन लादा नहीं जाना चाहिए। विरोध का तरीका ङ्क्षहसक नहीं होना चाहिए। कांग्र्रेस लोकतांत्रिक तरीके से विरोध की हिमायती है।

 



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