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अयोध्या में आज भी मजबूत है सदियों पुराना सामाजिक तानाबाना


SANDEEP PANDEY 06/12/2016 12.25 pm

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छह दिसम्बर 1992 को पूरे देश को झकझाेर कर रख देने वाली अयोध्या में बाबरी विध्वंश की ऐतिहासिक घटना भी यहां के मजबूत सामाजिक तानेबाने को डिगा नहीं सकी।
24 साल पहले अयोध्या में विवादित ढांचे के ढहाने के बाद हुये खून खराबे ने देश-विदेश के समाचार पत्रों में खूब सुर्खियां बटोरी थी। बडी तादाद में लोगों के मारे जाने के बावजूद पीडित लोगों ने अयोध्या नहीं छोडी और वे आज भी मिलजुल कर रहते हैं। उनमें से कई का कहना है कि स्थानीय लोगों की मदद की वजह से ही उनका वजूद बचा है। बाहर से आये लोगों ने उन्हें और उनकी सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाया था लेकिन,यह भी सत्य है कि पडोसी हिन्दुओं ने उनकी रक्षा की और उनका अभी भी उतना ही ख्याल रखते हैं।
छह दिसम्बर 1992 की घटना में छह बहनों में इकलौते भतीजे और बडे भाई को गंवा देने वाले रईस खान का कहना है कि उस दिन को वह जीवन भर नहीं भूल सकते, क्योंकि उसमें उन्होंने अपने परिवार के दो लोगों को खोया था। बाहरी लोगों ने उनके घर पर हमला कर घटना को अंजाम दिया था, लेकिन यह भी सही है कि पडोस में रहने वाले रामआसरे यादव अपने साथियों के साथ मेरे घर आ गये और उन्होंने परिवार के अन्य सदस्यों तथा सम्पत्ति की रक्षा की।
गुजरे क्षणों को याद कर उनका मन अभी भी भावुक हो जाता है। उन्होंने कहा कि वह श्री यादव और अन्य पडोसियों को कैसे भूल सकते हैं। आसपास के लोगों ने करीब एक सप्ताह तक उनके घर परिवार की रक्षा की। खाना खिलाते रहे। कई लोग तो रात में मेरे घर के आसपास पहरा देते थे। वह अपने भाई और भतीजे की हत्या तो नहीं भूल पा रहे हैं, लेकिन दु:ख की उस घडी में पडोसी हिन्दुओं से मिले सहयोग काे भी जीवन भर नहीं भुला पाएंगे।
रईस भाई ने बताया कि यही नहीं, आसपास के हिन्दू भाईयों ने बाद में उनकी भतीजियों की शादी में भी मदद की। श्री यादव तो एक भतीजी की शादी में चौबीसों घंटे डटे रहे। अयोध्या और उसके आसपास के मजबूत सामाजिक तानेबाने के बारे में कमोवेश बाबरी मस्जिद के मुद्दई रहे मोहम्मद हाशिम अंसारी के भतीजे असलम ने भी अपना अनुभव साझा किया।
असलम बताते हैं कि उनका घर विवादित धर्मस्थल और उसके आसपास अधिग्रहीत परिसर के ठीक सामने स्थित है। श्री अंसारी विवाद से सीधे जुडे थे फिर भी बाहर से आये कारसेवक उनके परिवार को नुकसान नहीं पहुंचा सके। स्थानीय हिन्दुओं ने उनकी सम्पत्ति की रक्षा की। उनके चचा का हालचाल लेने श्रीरामजन्म भूमि न्यास के तत्कालीन अध्यक्ष परमहंस रामचन्द्र दास भी आये थे। मजाल था कि कोई कारसेवक उनके घर की तरफ नजर उठा सके।अयोध्या में अरसे से फूल का कारोबार कर रहे रशीद खां कहते हैं कि उनका तो पूरा परिवार ही मंदिरों और महन्तों की बदौलत पल रहा है। हनुमानगढी और कनक भवन समेत कई मंदिरों में वह फूल देते हैं। उससे मिलने वाले पैसे से वह अपना और परिवार का गुजारा करते हैं। वह कहते हैं, “जीना यहां-मरना यहां, इसके सिवा जाना कहां।” अयोध्या छोडकर जाने का सवाल ही नहीं उठता। इससे सुरक्षित जगह रहने के लिए शायद ही कोई हो।
रशीद कहते हैं कि अयोध्या मुद्दे को लेकर देश- दुनिया में चाहे जाे हो गया हो लेकिन यहां आज भी भाई-चारा कायम है। रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जिस क्षेत्र में है वहां से अभी भी असद भाई ही सभासद चुने जाते हैं। विवादित धर्मस्थल के पास स्थित साकेत महाविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष अफसर मेंहदी उस समय चुने गये थे जब यह विवाद पूरे शबाब पर था। यहां के लोगों में अापसी प्रेम भाव बरकरार है।
दूसरी ओर, छह दिसम्बर आते ही यहां के सुरक्षा व्यवस्था को लेकर शासन प्रशासन के कान खडे हो जाते हैं। चन्द रोज पहले ही उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या, काशी और मथुरा में सुरक्षा व्यवस्था और चुस्त दुरुस्त करने के आदेश दिये थे। इस बार भी पिछले वर्षों की भांति अयोध्या और उसके आसपास के क्षेत्रों में धारा 144 लगा दी गयी है। अयोध्या को चार जोन और 12 सेक्टर में बांटकर सुरक्षा व्यवस्था मुकम्मल की जा रही है।
स्थानीय पुलिस के अलावा तीन अपर पुलिस अधीक्षक, 10 पुलिस उपाधीक्षक, 100 निरीक्षक और उप निरीक्षक, दो कम्पनी रैपिड एक्शन फोर्स और दस कम्पनी पीएसी की तैनाती की जा रही है। हर साल की तरह कल भी मुस्लिम संगठन यौमे-गम दिवस मनायेंगे जबकि विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) और अन्य हिन्दू संगठन छह दिसम्बर को शौर्य दिवस के रुप में याद करेंगे।
विहिप की माने तो मंदिरों और घरों में दीपक जलाने की भी अपील कर रही है। मुस्लिम नमाज में बाबरी मस्जिद के पुनर्निमाण के लिए दुआ करेंगे जबकि विहिप अपने स्थानीय मुख्यालय कारसेवकपुरम् में सभा कर मंदिर निर्माण के लिए हुंकार भरेंगे। साधु-संत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मंदिर निर्माण जल्द करवाने की अपील कर सकते हैं।
छह दिसम्बर की आपाधापी के बावजूद अयोध्या सामान्य है। राज्य सरकार ने कल ही बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर के परिनिर्वाण दिवस के कारण छुट्टी कर दी है इसलिए स्कूल, कालेज और कार्यालय बन्द रहेंगे। स्थानीय प्रशासन को शांति व्यवस्था बनाये रखने में इससे मदद मिलेगी। राज्य सरकार यदि छुट्टी नहीं भी करती तो भी कानून व्यवस्था को लेकर कोई फर्क पडने की आशंका नहीं थी क्योंकि यहां का सामाजिक तानाबाना काफी मजबूत है

 

 



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